Friday, May 22, 2020

Dreams, these days/ सपने, इन दिनों

Dreams, these days/ सपने, इन दिनों

Dreams, these days


Dreams, these days, are of the moon and moon-manufacturer!
The gripe translucent skies in the night
the mood swings of solitude, the cognizance of the air, purer,
the memories of missing moon motif, a vanished delight.

Dreams, these days, are of the sea and the seafarer.
The uncluttered, sweeping ocean epitomizes much more
than an unbiassed body of water; it embodies a malicious elegance
that never hesitates to induce the narrator.

Dreams, these days, are of some make-believe love and some eternal lover.
Ahh! Genuine love is measured by how deep you tumble
and adjudicated; mediated by how trivial you are,how willing to scuttle
just to save it and make it linger.

Dreams, these days, are of a comrade and about some paramour.
It is resolute by how keen you are to unclutter.
Offer your conviction. It is generous, incredible
and apparently very kind. It is, of course, often biased, it is colour blind.

Dreams, these days, are of travel and the traveler.
The wanderer and the wanderlust, the reminiscence and rumination.
Do not foldaway lost travel stories to the hermit’s harbour
there is a great lot you aught to see post contagion.

Dreams, these days are of many lands, many homes and the homemaker.
There is boundless share your passion daily does sought to travel.
You needn't unpack right away, keep your luggage at bay.
You are not parting, your authority shall you take back, oh seafarer!

Dreams these days are of a long life-- glorious, happier, healthier, better.
Still, if you succumb, the show goes on even minus you, so don't despair.
Dream anyway, love anyway; you shall soon find your ‘home’ awfully closer!
The marvels of the mourned sound colossal; they may, as well, entice and lure.






 सपनेइन दिनों


सपनों में आते हैं  इन दिनोंचांद और चाँद के सर्जनहार  !
रात का दुखदायी स्वच्छ नीलाम्बर
अकेलेपन के आस्वादन में परिवर्तनपवन का संज्ञान शुद्ध से शुद्धतर ,
खोए हुए चाँद की स्मृतियाँ विलुप्त होती खुशियों के  अंबार ।


सपनों में आते हैं  इन दिनोंसमुद्र और नाविक  !
नीरव हिलोरे खाता समुद्र  किस चीज का प्रतीक ?
निष्पक्ष जलाशय या विद्वेषी लालित्य का मानक ?
निस्संकोच जागता जिससे अंदर का कथा-वाचक ।


सपनों में आते हैं  इन दिनोंशाश्वत प्रेमी और मिथ्या-प्रेम   
आह! सच्चे-प्रेम का पैमानाकितनी गहराई तक डूबते हो तुम  
और न्याय-संगत ठहराए जाते हो कि कितने क्षुद्र हो तुम
फिर भी इच्छुक हो बचाने और दीर्घ करने को अपना धाम ।  


सपनों में आते हैं  इन दिनों एक कामरेड और उसके प्रेमिक  
अनिर्वचनीय है यह कि तुम व्यवस्थित होने के लिए हो कितने उत्सुक
समर्पित कर दो  तुम्हारा  प्रत्यय- जो है दयालुअविश्वसनीय और उदार ,
वास्तव में  यह होता है वर्णांध और  पक्षपातपूर्ण  अधिकतर ।


सपनों में आते हैं  इन दिनों सफर और सैलानीगण
पथिकभ्रमण-प्रेमसंस्मरण एवं चिंतन-मनन
मत मोड़ना लुप्त भ्रमण-कहानियों को साधुओं  के बंदरगाह की ओर  
बहुत कुछ  मिलेगा तुम्हें देखने के लिए संसर्ग के उत्तरोत्तर ।


सपनों में आते हैं  इन दिनों अनेक घरघर-निर्माता और अनेक स्थान
प्रतिदिन करना चाहता है बहुत सारी यात्राएं  तुम्हारा असीम  जुनून
आवश्यकता नहीं है खोलने की अभीपड़ा रहने दीजिए खाड़ी पर तुम्हारा सामान   
तुम नहीं जा रहे हो तुम्हारा मालिक फिर तुम्हें ले जाएगा ओह समुद्री इंसान !


सपनों में आते हैं  इन दिनों - शानदारखुशस्वस्थ बेहतर दीर्घ जीवन
अगर हुए हो शिकारमत होना निराशभले हीमिट गए हो नामो-निशान     
फिर भी सपने देखोप्यार करोपाओगे नजदीक अपना गंतव्य स्थान 
उनके भारी शोक-संगीत का चमत्कार भी शायद लग सके तुम्हें लुभावन ।


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